क्या होते है रिश्ते?
जैसे जीवन के वीराने में
हँसते हुए कमल खिलते.
तनहाइयों के ज़ख्मो पर
लेप मलते है ये रिश्ते.
कभी अपनाते, तो कभी
ठुकराते है ये रिश्ते.
नींद से बोझिल आँखों के लिए
लोरी है ये रिश्ते.
क्या होते है वो रिश्ते?
जो आसमान पर बैठा कर
धक्का देते ये रिश्ते,
कभी अपना सब कुछ लूटा कर,
तो कभी लूट लेते है ये रिश्ते.
ज़ख्म दे कर, ज़ख्मो पर
नमक छिड़कते है ये रिश्ते.
कभी ऐसे....तो कभी वैसे होते है ये रिश्ते
पर सच ही तो है
हम नहीं आज होते
अगर होते नहीं ये रिश्ते!