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Saturday, 30 April 2011

Rishtey

क्या होते है रिश्ते?
जैसे जीवन के वीराने में
हँसते हुए कमल खिलते.
तनहाइयों के ज़ख्मो पर
लेप मलते है ये रिश्ते.
कभी अपनाते, तो कभी 
ठुकराते है ये रिश्ते.
नींद से बोझिल आँखों के लिए
लोरी है ये रिश्ते.

क्या होते है वो रिश्ते?
जो आसमान पर बैठा कर
धक्का देते ये रिश्ते,
कभी अपना सब कुछ लूटा कर,
तो कभी लूट लेते है ये रिश्ते.
ज़ख्म दे कर, ज़ख्मो पर
नमक छिड़कते है  ये रिश्ते.

कभी ऐसे....तो कभी वैसे होते है ये रिश्ते
पर सच ही तो है
हम नहीं आज होते 
अगर होते नहीं ये रिश्ते!

Friday, 29 April 2011

Aap ka naam

दिल की कीताब पर छपा
बस आप ही का नाम है,

दिन-रात हूँ जो पढ़ती
ये वो कलाम है....

बेखुदी जिस की न जाए...
ये वो विनय का जाम है,

आप ही के लिए हाज़िर
ये ज़िन्दगी तमाम है.

लिखते हुए आप का ये कलाम 
गुम हम अब सुबह शाम है, 

हम ले आए  है तूफ़ान से कश्ती,
साहील  तक पहुँचाना अब आप का काम है.




Tuesday, 26 April 2011

Kal Aaj aur Kal

कल क्या होगा.....
सोच कर क्यों घबराता है मनं?
कल की आशंकाओ से क्यों घिरा रहता है ये मन?

कल तो जो होगा सो होगा
फिर क्यों कल की सोचे...
कल की चिन्ताओ में 
क्यों अपना आज हम खो दे?

हर आने वाले पल का
हम इंतज़ार करते है,
पर इस इंतज़ार में
खौफज़दा हम रहते है!

जो आज है, वो कल कल था,
जो कल है, वो कल आज होगा..
फिर क्यों कल के खौफ को पिए..
क्यों नहीं अपना आज हम जिए?