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Monday, 2 May 2011

Dekha hai humne

ज़िन्दगी की राह में
क्या क्या न देखा है हमने!
जो न ख्वाब में सोचा कभी
वह नज़ारा देखा है हमने.

इंसान को हैवान, और 
रक्षक को भक्षक बनते देखा है हमने,
रिश्तो का दमन, और 
इंसानियत का बलात्कार देखा है हमने!

महबूब की बेवफाई, और
दोस्त के हाथ में खंजर देखा है हमने,
मौसम तो क्या, तस्वीर
को भी रंग बदलते देखा है हमने!